‘सरप्राइज’ मीटिंग से गरमाई राजनीति, शरद पवार और शिंदे की मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को हुई एक अप्रत्याशित मुलाकात ने नए सियासी कयासों को जन्म दे दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने विधान भवन पहुंचकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से खास मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात को ऊपरी तौर पर शिष्टाचार या औपचारिक भेंट माना जा रहा है, लेकिन इसके समय और मौजूदा परिस्थितियों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म कर दिया है।
कैबिनेट बैठक रोककर किया पवार का स्वागत
दरअसल, शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मसले पर आयोजित 'महाराष्ट्र एकीकरण समिति' की बैठक में हिस्सा लेने विधान भवन पहुंचे थे। इस बैठक के संपन्न होने के तुरंत बाद वे सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक कार्यालय की ओर बढ़ गए। इस दौरान उनके साथ राकांपा के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे भी मौजूद रहे। जिस वक्त शरद पवार वहां पहुंचे, एकनाथ शिंदे कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक ले रहे थे, लेकिन पवार के आने की सूचना मिलते ही उन्होंने कैबिनेट बैठक को कुछ देर के लिए रोका और बाहर आकर उनका स्वागत किया। दोनों दिग्गजों के बीच बंद कमरे में करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई, जिसे राजनीतिक हलकों में शिंदे द्वारा पवार के प्रति दिखाए गए बड़े सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।
संभावित टूट-फूट के बीच बड़ा रणनीतिक संदेश
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के पीछे गहरे राजनीतिक मायने छिपे हैं। हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि शिंदे गुट की नजर अब शरद पवार की पार्टी के नेताओं पर भी हो सकती है। ऐसे असमंजस भरे माहौल में शरद पवार का खुद चलकर उपमुख्यमंत्री के दफ्तर पहुंचना एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इस कदम के जरिए पवार ने अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि वे जमीनी हकीकत और हर राजनीतिक हलचल पर पूरी नजर बनाए हुए हैं, जिससे संगठन के भीतर किसी भी संभावित टूट-फूट को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस के लिए भी छिपे संकेत
इस 15 मिनट की मुलाकात को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी एक परोक्ष (अप्रत्यक्ष) सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री से मिलने के बजाय सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से संवाद साधकर शरद पवार ने यह साफ कर दिया कि वे सत्ता के सभी मजबूत केंद्रों के साथ सीधा संपर्क रखने की कूटनीतिक क्षमता रखते हैं। पवार की यह पुरानी सियासी शैली रही है कि वे धुर विरोधियों के साथ भी बातचीत के रास्ते कभी पूरी तरह बंद नहीं करते।
असमंजस में विरोधी, आने वाले दिनों पर टिकी नजर
शिंदे के दोबारा अपनी कैबिनेट बैठक में लौटने के बाद भी शरद पवार कुछ समय तक उनके कार्यालय में ही बैठे रहे और अपने विधायकों के साथ आगामी रणनीति पर चर्चा करते रहे। फिलहाल, इस मुलाकात के मुख्य एजेंडे या दोनों के बीच हुई बातचीत के मूल विषय को लेकर दोनों ही पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विषय का खुलासा न होने से विरोधी खेमे में असमंजस की स्थिति है। इस मुलाकात के वास्तविक परिणाम और इसके पीछे का असली राजनीतिक गेम प्लान आने वाले दिनों में राज्य की बदलती सियासी करवटों के साथ और स्पष्ट हो सकेगा।
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