डूंगरपुर में अचानक हड़कंप, बाद में निकली मॉक ड्रिल की सच्चाई
राजस्थान। डूंगरपुर शहर में शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गैपसागर की पाल स्थित 'जज साहब के दरवाजे' के समीप अचानक बम धमाकों और एयर स्ट्राइक जैसी आवाजें गूँज उठीं। हालांकि, जैसे ही प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह एक मॉक ड्रिल (पूर्वाभ्यास) है, तब जाकर स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली।
प्रशासनिक मुस्तैदी का सफल परीक्षण
जिला पुलिस कंट्रोल रूम से हवाई हमले की सूचना प्रसारित होते ही पूरा सरकारी अमला सक्रिय हो गया। नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के इस अभ्यास के दौरान प्रशासन की तत्परता देखने को मिली:
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त्वरित कार्रवाई: जिला कलेक्टर देशलदान और पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल, एसडीआरएफ, दमकल और एम्बुलेंस की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुँच गईं।
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बचाव कार्य: एसडीआरएफ के 10 सदस्यीय दल ने मलबे और आपदा क्षेत्र से 'घायलों' को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें स्ट्रेचर के माध्यम से प्राथमिक चिकित्सा देकर एम्बुलेंस से जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुँचाया गया।
सायरन और ब्लैकआउट से परखी गई तैयारी
अभ्यास के दौरान पूरे शहर में आपातकालीन सायरन बजाए गए और कुछ समय के लिए ब्लैकआउट (बिजली बंद) किया गया। इसका उद्देश्य युद्ध जैसी परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तालमेल को परखना था।
उपस्थित अधिकारी और चिकित्सा व्यवस्था
इस मॉक ड्रिल की निगरानी के लिए कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे, जिनमें:
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अतिरिक्त जिला कलेक्टर दिनेश धाकड़
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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलंकार गुप्ता
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उपखंड अधिकारी सोनू गुर्जर
चिकित्सा विभाग ने इस दौरान आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का गहन अभ्यास किया। प्रशासन ने बताया कि इस प्रकार के अभ्यास भविष्य में किसी भी वास्तविक संकट या आपदा के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने और राहत कार्यों को गति देने में सहायक सिद्ध होते हैं।
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