अजमेर|फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर आरएएस में नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले का बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने Blind/Low Vision श्रेणी का गलत लाभ लेकर आरएएस भर्ती-2022 में नियुक्ति प्राप्त की थी।सिविल लाइंस थाना प्रभारी शम्भू सिंह शेखावत ने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) अजमेर की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी कि अरुण शर्मा पुत्र गोपाललाल शर्मा, निवासी ग्राम जावा सिसोदिया, तहसील डेगाना, जिला नागौर ने संयुक्त भर्ती परीक्षा-2018 में दिव्यांग श्रेणी का लाभ लेते हुए आवेदन किया था। आरोपी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, फोटो और हस्ताक्षरों के आधार पर उसे वर्ष 2022 में आरएएस पद पर नियुक्ति दी गई थी।शिकायत मिलने के बाद सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मामले की गहन जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी था। उसने सरकारी नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और उन्हें असली बताकर उपयोग किया। इस पर पुलिस थाना सिविल लाइंस अजमेर में प्रकरण संख्या 251/2025 दर्ज किया गया। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 एवं 471 के तहत दर्ज कर जांच शुरू की गई।

अब यदि खुले में नहाते दिखे नगर परिषद वसूलेगी 100 रुपये जुर्माना, सख्ती से लागू होंगे ये नियम

थानाधिकारी शेखावत ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजी जांच के आधार पर आरोपी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार कराने से जुड़े तथ्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने प्रमाण पत्र बनवाने या सत्यापन प्रक्रिया में भूमिका निभाई। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को यह फर्जी प्रमाण पत्र किन माध्यमों और किस स्तर पर उपलब्ध कराया गया। पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।थानाधिकारी शम्भू सिंह शेखावत ने कहा कि सरकारी नौकरियों में दिव्यांग श्रेणी के लाभ का दुरुपयोग करना गंभीर अपराध है, जिससे वास्तविक जरूरतमंद दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन होता है। पुलिस ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वालों में हड़कंप मच गया है और आमजन में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सकारात्मक संदेश गया है।