जयपुर जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम आने से पहले राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। 14 सितंबर को होने वाली मतगणना के बाद पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी की पुख्ता तैयारी शुरू कर दी है। इस रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा के आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

कांग्रेस की रणनीति और नेताओं की जिम्मेदारियां

इस बैठक में पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, विधानसभा में विपक्ष के सचेतक रफीक खान, विधायक अमीन कागजी और अर्चना शर्मा समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। पार्टी ने अपने सभी विधायकों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के प्रत्याशियों के लगातार संपर्क में रहें। कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य न केवल चुनाव जीतना है, बल्कि 21 सितंबर को होने वाले मेयर और 22 सितंबर को होने वाले डिप्टी मेयर के चुनाव तक अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखना है।

रफीक खान के गंभीर आरोप और दावे

विपक्ष के सचेतक रफीक खान ने सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए आशंका जताई कि चुनाव परिणामों के बाद बोर्ड गठन के लिए सरकारी मशीनरी, पुलिस और धनबल का दुरुपयोग किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जयपुर नगर निगम में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाएगी और मुकाबले में बीजेपी तीसरे स्थान पर खिसक जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बाड़ाबंदी या अन्य फैसलों पर अंतिम निर्णय पार्षदों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और आगे की राह

150 वार्डों वाले जयपुर नगर निगम में कई सीटों पर त्रिकोणीय व बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिला है। यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो ऐसी स्थिति में बागी और निर्दलीय पार्षद बोर्ड के गठन में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए न केवल अपने विजयी प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की जुगत में है, बल्कि चुनाव जीतने वाले प्रमुख निर्दलीयों और पार्टी छोड़कर चुनाव लड़ने वाले बागियों की घर वापसी पर भी नजर बनाए हुए है।