जयपुर:राजस्थान में लंबे समय से अटके पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों की उलझन अब सुलझती दिख रही है। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष विस्तृत चुनाव कार्यक्रम और संभावित समय-सारणी जमा कर दी है। स्वायत्त शासन विभाग के उप निदेशक ने न्यायालय में जवाब पेश करते हुए जानकारी दी कि पूर्व आदेश के अनुपालन में मुख्य सचिव की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग, पंचायतीराज और स्वायत्त शासन विभाग के उच्च अधिकारी शामिल रहे।

अगस्त के मध्य तक पूरी होगी आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया

बैठक में तय रणनीति के अनुसार ओबीसी आयोग आगामी 5 अगस्त तक अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगा। इसके ठीक बाद स्वायत्त शासन और पंचायतीराज विभाग हरकत में आते हुए 15 अगस्त तक अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिला वर्गों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगे।

हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद जारी होगा चुनावी कार्यक्रम

आरक्षण की लॉटरी पूरी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग को अगले 90 दिनों के भीतर प्रदेश भर में पंचायत और निकाय चुनाव कराने का जिम्मा दिया जाएगा। इस संपूर्ण शेड्यूल और कार्ययोजना पर हाईकोर्ट में दोपहर 2 बजे अहम सुनवाई तय की गई है, जहाँ अदालत सरकार के इस प्रस्ताव की समीक्षा करेगी।

नवंबर तक पूरी हो सकती है संपूर्ण मतदान प्रक्रिया

यदि उच्च न्यायालय राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए इस संभावित शेड्यूल पर अपनी सहमति दे देता है, तो प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव का पहला चरण अगस्त के अंतिम हफ्ते या सितंबर की शुरुआत में आयोजित हो सकता है। सरकार की योजना के अनुसार पूरे राज्य में मतदान और मतगणना की यह प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूर्ण करा ली जाएगी।

स्थानीय शासन व्यवस्था को मिलेगी नई गति

चुनावों का रास्ता साफ होने से ग्रामीण और शहरी निकायों के रुके हुए विकास कार्यों को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से जनप्रतिनिधियों के अभाव में प्रशासकों के भरोसे चल रही व्यवस्था अब खत्म होगी और नई निकायों के गठन से आम जनता की प्रशासनिक और विकास संबंधी समस्याओं का समय पर निस्तारण संभव हो सकेगा।