वांगचुक की हिरासत को लेकर टीकाराम जूली का बड़ा बयान, बोले लोकतंत्र खतरे में
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले तीन हफ्तों से शांतिपूर्ण अनशन पर बैठे विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सुरक्षाबलों द्वारा प्रदर्शनकारी को जबरन हिरासत में लेकर अस्पताल पहुंचाए जाने की कड़ी निंदा की है। नेता प्रतिपक्ष ने इस प्रशासनिक कदम को पूरी तरह अलोकतांत्रिक और दमनकारी बताते हुए कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है।
छात्रों के हितों और लद्दाख के मुद्दों पर आंदोलन
मामले की पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए विपक्ष के नेता ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता पिछले 20 दिनों से देश के युवाओं और छात्रों से जुड़े बेहद गंभीर मुद्दों को लेकर आंदोलनरत थे। वे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में सामने आई कथित विसंगतियों, पेपर लीक मामलों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे। इसके साथ ही, लद्दाख क्षेत्र के विकास और वहां की जनता से किए गए पुराने प्रशासनिक वादों को पूरा कराने के लिए वे अहिंसक तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे, जिसे सरकार ने लंबे समय तक नजरअंदाज किया।
संवेदनशीलता के अभाव और बल प्रयोग का आरोप
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक चले आंदोलन के दौरान शासन ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। जब अनशन के कारण आंदोलनकारी के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी और इस मुहिम को देश के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा, तब प्रशासन ने सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय बलपूर्वक उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष में थोड़ी भी संवेदनशीलता बची होती, तो वे अस्पताल भेजने से पहले आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर उनकी जायज मांगों पर विचार-विमर्श करते।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और पेपर लीक पर घेराव
शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और धांधली के मामलों ने देश के लाखों होनहार विद्यार्थियों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने और जवाबदेही तय करने के बजाय व्यवस्था से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे युवाओं का भरोसा टूट रहा है।
जनभावनाओं की अनदेखी और लोकतांत्रिक अधिकार
बयान के अंत में उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र में किसी भी चुनी हुई सरकार का यह परम कर्तव्य होता है कि वह आम जनता और युवाओं की जायज मांगों को पूरे धैर्य के साथ सुने। देश के नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी व्यवस्था को देश की जनता लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी। भारत की लोकतांत्रिक नींव बेहद मजबूत है और यहां की जनता समय आने पर अपने मताधिकार के प्रयोग से बड़े-से-बड़े राजनीतिक नेतृत्व को बदलने की क्षमता रखती है, इसलिए किसी भी सत्ता को जनभावनाओं का अनादर नहीं करना चाहिए।
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