पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार खुलकर सामने आए हैं। जंतर-मंतर पर 19 दिनों से चल रहे उनके अनशन और गिरती सेहत को लेकर कलाकारों ने अपनी गहरी चिंता जताई है और सरकार से इस पर तुरंत गौर करने की अपील की है। सोनम वांगचुक की टीम ने उन सभी कलाकारों का आभार व्यक्त किया है, जो इस कठिन समय में उनके साथ एकजुटता दिखा रहे हैं।

सोनाक्षी सिन्हा का सरकार से तीखा सवाल

अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में एक वीडियो जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा:

"मैं आमतौर पर ऐसे बयान नहीं देती, लेकिन अब मुझसे रहा नहीं जा रहा। सोनम वांगचुक 18 दिन से अनशन पर हैं। वह उन छात्रों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं जो उन्हें बर्बादी की ओर जाता दिख रहा है। वह उस सिस्टम से लड़ रहे हैं जो ठीक से काम नहीं कर रहा है। वह खुद को राष्ट्र विरोधी नहीं मानते, बल्कि देश का भला चाहते हैं। अगर सोनम वांगचुक को कुछ हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?"

ओमी वैद्य ने जताई चिंता: 'नहीं चाहता कि फुंसुक वांगडू मरें'

फिल्म '3 इडियट्स' में 'चतुर' की भूमिका निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने भी इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा:

"मैं नहीं चाहता कि फुंसुक वांगडू मर जाएं। क्या आप जानते हैं कि फिल्म के उस किरदार की प्रेरणा असल जिंदगी के सुधारक सोनम वांगचुक हैं? मैं उनसे मिल चुका हूं और वह एक अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उनका ब्लड शुगर बहुत कम हो गया है। मैं बस यही चाहता हूं कि लोग इस स्थिति पर ध्यान दें। आप उनसे सहमत हों या न हों, लेकिन मैं नहीं चाहता कि उनकी जान जाए।"

प्रमुख कलाकारों ने जताया समर्थन

सोनम वांगचुक के इस संघर्ष में मनोरंजन जगत के कई अन्य सितारों ने भी अपना नैतिक समर्थन दिया है। इन कलाकारों ने उनके प्रयासों को सराहा है और सरकार से इस मुद्दे पर संवेदनशील रुख अपनाने की मांग की है। समर्थन करने वाले प्रमुख सितारों में शामिल हैं:

  • फातिमा सना शेख, समय रैना, सान्या मल्होत्रा और इमरान खान।

सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने उनसे अपना अनशन समाप्त करने की अपील भी की है। यह आंदोलन देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।