जयपुर: राजस्थान में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों की संख्या को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। यूडीआईएसई (UDISE) की ओर से जारी ताजा आधिकारिक रिपोर्ट के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले दो शैक्षणिक सत्रों के भीतर स्कूलों में विद्यार्थियों के कुल नामांकन में 8.4 लाख से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस प्रशासनिक रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

सरकारी स्कूलों में भारी गिरावट और निजी विद्यालयों का बढ़ता ग्राफ

शिक्षा विभाग की इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति सरकारी शिक्षण संस्थानों की सामने आई है, जहां से लाखों की संख्या में छात्रों का मोहभंग हुआ है। यूडीआईएसई के आंकड़ों के मुताबिक, जहां सरकारी स्कूलों में दो वर्षों के भीतर कुल 9.3 लाख विद्यार्थियों का नामांकन कम हो गया है, वहीं इसके बिल्कुल विपरीत निजी (प्राइवेट) स्कूलों में इसी समयावधि के दौरान लगभग 11.3 लाख नए छात्र-छात्राओं का दाखिला हुआ है। यह स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अब सरकारी व्यवस्था से दूरी बनाकर अपने बच्चों के भविष्य के लिए निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं।

पूर्व शिक्षा मंत्री ने सरकार को घेरा और स्वतंत्र जांच की मांग उठाई

इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने मौजूदा भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे राज्य के इतिहास में "शिक्षा का सबसे बड़ा घोटाला" करार देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से गायब होना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर सामाजिक विषय है। उन्होंने मांग की है कि इस बड़े नामांकन घाटे के पीछे की असली वजहों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।

विपक्ष का आरोप और कांग्रेस शासनकाल के आंकड़ों का हवाला

डोटासरा ने अपनी बात को मजबूती से रखते हुए दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश के स्कूलों में कुल नामांकन हमेशा 1.74 करोड़ से अधिक के स्तर पर स्थिर बना रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही यह गिरावट शुरू हुई है। विपक्ष का यह भी कहना है कि वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू किए गए अंग्रेजी माध्यम के महात्मा गांधी स्कूलों की अवधारणा को पूरी तरह कमजोर कर दिया और राज्य में सैकड़ों सरकारी स्कूल बंद कर दिए, जिसका सीधा नकारात्मक असर गरीब बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है।

एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हजारों स्कूल और विसंगतियों का खुलासा

इस सरकारी रिपोर्ट में राज्य की स्कूली शिक्षा की कई अन्य बड़ी विसंगतियां और बुनियादी कमियां भी उजागर हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में इस वक्त लगभग 7,200 ऐसे सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां 1.78 लाख से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई का पूरा जिम्मा केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहा है। सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह सामने आया है कि राज्य में 140 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां पढ़ने वाला एक भी विद्यार्थी मौजूद नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन बंद पड़े स्कूलों में 189 शिक्षक आज भी कागजों पर पदस्थापित हैं और वेतन उठा रहे हैं।