पांचना बांध से 2 दशक बाद फिर बहा पानी, नहरों और लिफ्ट परियोजना का टेस्ट रन सफल
करौली: जिले के कृषि इतिहास और स्थानीय किसानों के लिए गुरुवार का दिन एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव का साक्षी बना। पिछले करीब 20 वर्षों से निरंतर तकनीकी विवादों, प्रशासनिक बाधाओं और कानूनी पेंच से जूझ रहे प्रसिद्ध पांचना बांध के स्लूस गेटों की व्यापक मरम्मत का काम आखिरकार पूरा कर लिया गया है। इसके तुरंत बाद बांध से जुड़ी विभिन्न मुख्य नहरों, नदी प्रवाह क्षेत्रों और गुडला-पहुंचना लिफ्ट परियोजना में आधिकारिक तौर पर भारी मात्रा में पानी छोड़कर एक सफल टेस्ट रन (प्रायोगिक परीक्षण) किया गया। प्रशासनिक अमले और क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की जीवंत मौजूदगी में हुए इस सफल परीक्षण के बाद अब इलाके की सूखी पड़ी सिंचाई व्यवस्था के जल्द बहाल होने की उम्मीदें बेहद मजबूत हो गई हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई विधिवत पूजा
इस बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण टेस्ट रन की शुरुआत बेहद गौरवपूर्ण माहौल में की गई। पांचना बांध परिसर में संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया, जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.के. अग्रवाल, जिला कलक्टर अक्षय गोदारा, पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, सवाई माधोपुर के जिला कलक्टर कानाराम सहित गुडला-पटना संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धावाई की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी वरिष्ठ अधिकारियों और किसान नेताओं ने मिलकर बांध के मुख्य स्लूस गेटों की विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया। इसके ठीक बाद बांध के विशाल गेटों को खोला गया और कमांड एरिया की सभी नहरों सहित लिफ्ट परियोजना के प्रवाह क्षेत्रों में पानी का तेज बहाव शुरू कर दिया गया।
पुरानी तकनीकी खामियों को दूर कर किया गया जल का सफल रिसाव
ज्ञात हो कि इसी महीने की 6 जुलाई को करीब दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद बांध से पानी छोड़ने का एक प्रारंभिक प्रयास किया गया था, लेकिन उस समय स्लूस गेटों में अचानक आई गंभीर तकनीकी खराबी के कारण पानी की पर्याप्त निकासी संभव नहीं हो सकी थी। इस विफलता से आक्रोशित होकर स्थानीय किसानों ने बड़ा आंदोलन करते हुए चक्काजाम कर दिया था। इसके बाद राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने मामले में सीधा हस्तक्षेप किया। दोनों मंत्रियों के कड़े दिशा-निर्देशों पर बाहर से बुलाए गए विशेषज्ञ तकनीशियनों और पेशेवर डाइवर्स (गोताखोरों) की टीमों ने दिन-रात एक करके पानी के भीतर गेटों की जटिल मरम्मत की और इस तकनीकी बाधा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया।
करोड़ों रुपये के कृषि कारोबार में वृद्धि की आस और नई मांग
इस सफल परीक्षण से पूरे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और उन्होंने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जताई है। ग्राम उत्थान समिति के अध्यक्ष रघुवीर मीणा ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नहरों में नियमित जलापूर्ति शुरू होने से क्षेत्र के ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और हर साल होने वाले कृषि कारोबार में करोड़ों रुपये की भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार से इन स्लूस गेटों को पूरी तरह से मोटराइज्ड और स्वचालित (ऑटोमेटेड) प्रणालियों से लैस करने की एक नई मांग भी उठाई है और इस त्वरित समाधान के लिए पूरे शासन तंत्र का सहृदय आभार प्रकट किया है।
दो दशकों पुराने बड़े विवाद के स्थायी समाधान की ओर बढ़े कदम
सफल टेस्ट रन की तकनीकी पुष्टि करते हुए संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया ने आधिकारिक तौर पर बताया कि बांध के गेटों की सभी अंदरूनी कमियां अब पूरी तरह से ठीक कर दी गई हैं। प्रायोगिक तौर पर छोड़ा गया पानी बिना किसी रुकावट के कमांड एरिया, नदी प्रवाह क्षेत्रों और लिफ्ट परियोजना से जुड़े अंतिम छोर के खेतों तक सफलतापूर्वक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि इस बड़ी सफलता के साथ ही पिछले 20 वर्षों से चला आ रहा एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल क्षेत्रीय विवाद अब पूरी तरह से समाप्त होने की दिशा में बढ़ चुका है, जो सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक बहुत बड़ी राहत की बात है।
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