वंदे भारत बनी यात्रियों की पहली पसंद, 83% बढ़ी संख्या; कमाई में भी बड़ा उछाल
नई दिल्ली। देश के प्रमुख रेल मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों की तादाद में लगातार बड़ा इजाफा हो रहा है। यही वजह है कि अधिकांश व्यस्त रूटों पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों को कन्फर्म सीट हासिल करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, साधारण मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ-साथ अब वंदे भारत जैसी प्रीमियम और आधुनिक ट्रेनों में भी यात्रियों की भीड़ तेजी से बढ़ रही है, जबकि इन ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों के मुकाबले काफी अधिक है।
वंदे भारत एक्सप्रेस के यात्रियों में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी
हालिया वित्तीय तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान उत्तर रेलवे के नेटवर्क से संचालित होने वाली विभिन्न वंदे भारत ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है। इस तीन महीने की अवधि में रिकॉर्ड 1,47,462 यात्रियों ने वंदे भारत ट्रेनों के जरिए अपनी यात्रा पूरी की। यदि इसकी तुलना पिछले वर्ष की समान अवधि से की जाए, तो उस समय यह आंकड़ा महज 80,394 यात्रियों का था। इस प्रकार प्रीमियम श्रेणी की इन आधुनिक ट्रेनों के सफर को चुनने वाले यात्रियों की कुल संख्या में करीब 83 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
यात्री संख्या बढ़ने से रेलवे के राजस्व में भारी उछाल
यात्रियों की इस रिकॉर्ड आमद के चलते रेलवे के खजाने में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से प्राप्त होने वाला कुल राजस्व 7.67 करोड़ रुपये से उछलकर सीधे 13.21 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। राजस्व के मामले में दर्ज की गई यह वृद्धि दर लगभग 72 प्रतिशत की रही है, जो यह दर्शाती है कि आरामदायक सफर के लिए यात्री प्रीमियम दरों पर भी टिकट खरीदने को सहर्ष तैयार हैं।
अधिक किराया होने के बावजूद लगातार बढ़ती लोकप्रियता
रेलवे के समग्र आंकड़ों को देखें तो जहां से ट्रेनें अपनी यात्रा शुरू करती हैं, वहां से यात्रा आरंभ करने वाले प्रारंभिक रेल यात्रियों की संख्या भी 11.43 करोड़ से बढ़कर अब 12.07 करोड़ तक पहुंच गई है, जो सीधे तौर पर 5.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इसके साथ ही, यात्रियों से मिलने वाली कुल प्रारंभिक आय भी 3,083.42 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा बढ़कर 3,567.59 करोड़ रुपये के स्तर को छू चुकी है। राजस्व के इस मोर्चे पर 15.7 प्रतिशत की शानदार प्रगति दर्ज हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महंगे किराये के बावजूद रेलवे की विश्वसनीयता लोगों के बीच मजबूत हुई है।
सफलता के पीछे कुशल प्रबंधन और टीम की सामूहिक प्रतिबद्धता
उत्तर रेलवे के प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन शानदार उपलब्धियों और राजस्व में रिकॉर्ड सुधार के पीछे निरंतर और सुनियोजित प्रयास रहे हैं। परिचालन रणनीति को मजबूत करने, रेल संसाधनों का अधिक से अधिक सदुपयोग सुनिश्चित करने, टिकटों की जांच के लिए बेहद प्रभावी एवं सख्त व्यवस्था लागू करने तथा हर स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के सक्रिय सहयोग से यह मुकाम हासिल हुआ है। इसके साथ ही, लगातार की जा रही निगरानी और प्रशासनिक पर्यवेक्षण ने भी व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। रेलवे प्रशासन ने प्रतिबद्धता जताई है कि आने वाले समय में भी यात्रियों को और अधिक बेहतर सेवाएं देने तथा राजस्व में निरंतर बढ़ोतरी करने के लिए इसी समर्पण भाव से कार्य जारी रहेगा।
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