1.14 करोड़ के धान खरीदी घोटाले से हड़कंप, तीन कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज
कांकेर: छत्तीसगढ़ के प्रमुख धान उत्पादक जिलों में शुमार कांकेर से सहकारिता और सरकारी धान खरीदी व्यवस्था में सेंधमारी का एक बेहद गंभीर और बड़ा वित्तीय अपराध का मामला सामने आया है। जिले के तालाकुर्रा धान उपार्जन केंद्र में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान भारी प्रशासनिक लापरवाही और साठगांठ से ₹1,14,47,308 (एक करोड़ चौदह लाख सैंतालीस हजार तीन सौ आठ रुपये) के सरकारी धन का गबन और वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है।
इस संवेदनशील मामले का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए धान खरीदी केंद्र के तीन जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा (एफआईआर) दर्ज कर लिया है। पुलिस की इस ताबड़तोड़ कानूनी कार्रवाई के बाद कांकेर जिले की तमाम सहकारी समितियों, प्रभारियों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है।
समिति के प्रबंधक ने खुद दर्ज कराई एफआईआर; सरकारी रिकॉर्ड में मिलीं थीं भयावह गड़बड़ियां
कांकेर: इस करोड़ों रुपये के गबन का खुलासा तब हुआ जब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर धान खरीदी और उठाव (परिवहन) के रिकॉर्ड का भौतिक व डिजिटल सत्यापन किया गया:
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प्रबंधक की लिखित शिकायत: आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित मरकाटोला के मुख्य प्रबंधक संतोष राजपूत ने तालाकुर्रा उपार्जन केंद्र के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि कागजों पर दिखाई गई धान की खरीदी और वास्तव में भंडारित व परिवहन किए गए धान के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर है।
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तीन कर्मचारियों पर कसा कानूनी शिकंजा: गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद समिति प्रबंधक ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए धान खरीदी केंद्र के तत्कालीन प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और रात की सुरक्षा के लिए तैनात चौकीदार के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी (420), अमानत में खयानत (409) और सरकारी धन के गबन सहित आईपीसी/बीएनएस की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें नामजद किया है।
41 हजार क्विंटल से अधिक धान की हुई थी रिकॉर्ड सरकारी तौल; मिलिंग और परिवहन के समय खुली पोल
कांकेर: यह पूरा घपला धान की रिकॉर्ड आवक और मिलरों को दिए जाने वाले उठाव पत्र (डीओ) के मिलान के दौरान पकड़ा गया:
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धान खरीदी का सरकारी आंकड़ा: चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान तालाकुर्रा केंद्र में किसानों से कुल 41,223 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया था।
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परिवहन में भारी अंतर: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस खरीदे गए धान में से केवल 37,396.52 क्विंटल धान का ही परिवहन राइस मिलरों और शासकीय संग्रहण केंद्रों (संग्रहण डिपो) तक सुरक्षित रूप से किया जा सका था। शेष बचे धान और उसके एवज में किए गए भुगतान के आंकड़ों का जब मिलान किया गया, तो ₹1.14 करोड़ से अधिक का अंतर सामने आया, जिसे ठिकाने लगा दिया गया था।
सहकारी अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग; किसानों के हक पर डाका डालने वालों को सजा दिलाने की तैयारी
कांकेर: सहकारी समिति के प्रबंधक और स्थानीय किसान प्रतिनिधियों ने दोषियों को किसी भी कीमत पर न बख्शने और उनसे पाई-पाई की वसूली करने की मांग की है:
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लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं कर्मचारी: एफआईआर दर्ज कराने वाले समिति प्रबंधक ने अपनी लिखित शिकायत में यह कानूनी पक्ष भी मजबूती से रखा है कि छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 87 के तहत सहकारी समिति के कर्मचारी सीधे तौर पर 'लोक सेवक' (पब्लिक सर्वेंट) की श्रेणी में आते हैं।
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कठोरतम कार्रवाई की जरूरत: लोक सेवक होने के नाते यदि इन कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और सरकारी पद का दुरुपयोग कर किसानों की गाढ़ी कमाई व समिति की संपत्ति को गबन के जरिए नुकसान पहुंचाया है, तो इनके खिलाफ देश के सबसे कड़े प्रशासनिक और वित्तीय कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इससे आने वाले समय में अन्य उपार्जन केंद्रों के कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश जाएगा।
पुलिस टीम ने जब्त किए डिजिटल दस्तावेज और तौल कटीपें; कड़ाई से पूछताछ और धरपकड़ जारी
कांकेर: आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर स्थानीय पुलिस बल ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है:
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रिकॉर्ड सील किए गए: पुलिस की एक विशेष टीम ने तालाकुर्रा धान उपार्जन केंद्र पहुंचकर धान खरीदी से जुड़े तमाम कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट लॉग्स, भौतिक तौल पर्चियां (कटीपें), बारदाना स्टॉक रजिस्टर और परिवहन चालान को अपने कब्जे में लेकर सील कर दिया है।
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बड़ी साजिश की आशंका: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर मामला सीधे गबन का लग रहा है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस सिंडिकेट में कुछ अन्य रसूखदार लोग या राइस मिलर भी शामिल हों। फिलहाल आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक व ऑडिट जांच कराई जा रही है ताकि गबन की गई पूरी राशि का सटीक पता लगाया जा सके।
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