बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से डिजिटल ठगी और सरकारी योजनाओं के नाम पर गरीबों के अधिकारों पर डाका डालने का एक बेहद ही हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ राज्य सरकार की अत्यंत लोकप्रिय 'महतारी वंदन योजना' का लाभ दिलाने और केवाईसी (KYC) कराने के बहाने ग्रामीण महिलाओं के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया गया है।

असामाजिक तत्वों ने योजना के सत्यापन के नाम पर महिलाओं के जरूरी दस्तावेज और उनके फिंगरप्रिंट (बायोमेट्रिक अंगूठे के निशान) हासिल किए और फिर उसी डेटा का दुरुपयोग करते हुए कुंदीकला गांव की 113 निरक्षर व कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के नाम पर करीब 980 बोरी सरकारी खाद (उर्वरक) का अवैध रूप से फर्जी आहरण (उठाव) कर लिया। इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद पूरे जिले के किसान और ग्रामीण आक्रोशित हैं।

राजपुर विकासखंड के कुंदीकला गांव में बुना गया था ठगी का जाल; ऐसे दिया गया वारदात को अंजाम

यह पूरा सुनियोजित फर्जीवाड़ा बलरामपुर जिले के अंतर्गत आने वाले राजपुर विकासखंड के कुंदीकला गांव का है। ग्रामीण महिलाओं और उनके परिवारों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस ठगी को बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया गया:

  • मदद के बहाने ली गोपनीय जानकारी: गांव में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के संचालक ने महिलाओं को झांसा दिया कि सरकार के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार 'महतारी वंदन योजना' की अगली किस्तों को जारी रखने के लिए उनके बैंक खातों और दस्तावेजों का केवाईसी (KYC) होना अनिवार्य है।

  • अंगूठे का गलत इस्तेमाल: गांव की भोली-भाली महिलाएं इस झांसे में आ गईं और उन्होंने बेझिझक होकर अपने आधार कार्ड सौंप दिए और बायोमेट्रिक मशीन पर अपने अंगूठे के निशान लगा दिए। महिलाओं को लगा कि वे अपने हक की सरकारी राशि के लिए प्रक्रिया पूरी कर रही हैं।

  • खाद घोटाले में बदला डेटा: लेकिन आरोपियों ने इन बायोमेट्रिक निशानों और आधार डेटा को महतारी वंदन योजना के पोर्टल पर इस्तेमाल करने के बजाय सरकारी खाद वितरण प्रणाली (PoS मशीन) पर एक्सेस कर लिया। आरोपियों ने कागजों पर दिखा दिया कि इन 113 महिलाओं ने कृषि कार्य के लिए सैकड़ों बोरी खाद की खरीद की है, जबकि वास्तव में महिलाओं को इस बात की भनक तक नहीं थी।

किसानों को जब नहीं मिली खाद, तब जाकर फूटा भंडाफोड़; 25 जून को कलेक्टर और पुलिस से की गई शिकायत

इस बड़े डिजिटल घोटाले की हकीकत तब सामने आई जब खरीफ सीजन की बुवाई के दौरान गांव के वास्तविक और जरूरतमंद किसानों को सहकारी समितियों और दुकानों से खाद नहीं मिल पा रही थी। जब किसानों ने रिकॉर्ड चेक करवाया, तो पता चला कि उनके घर की महिलाओं के नाम पर पहले से ही कोटे की सैकड़ों बोरी खाद निकाली जा चुकी है:

  • एसडीएम और थाने में गुहार: इस गंभीर हेराफेरी से आक्रोशित होकर कुंदीकला गांव के दर्जनों ग्रामीणों और पीड़ित महिलाओं ने एकजुट होकर बीते 25 जून 2026 को जिला मुख्यालय में कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा। साथ ही, राजपुर के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय और स्थानीय राजपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

  • सगे भाई निकले मुख्य आरोपी: महिलाओं की शिकायत पर राजपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की पड़ताल की। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद स्थानीय सीएससी (CSC) सेंटर संचालक और उसके खाद विक्रेता भाई के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और जालसाजी की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी आपस में सगे भाई हैं और मिलकर इस काले धंधे को चला रहे थे।

नायब तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में हुई पुष्टि; 113 महिलाओं के हक पर डाला गया था डाका

प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर नायब तहसीलदार स्तर के राजस्व अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। इस जांच दल ने कुंदीकला गांव पहुंचकर पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज किए और सरकारी वितरण प्रणाली के ऑनलाइन लॉग्स को खंगाला:

  • फर्जीवाड़े की आधिकारिक पुष्टि: नायब तहसीलदार की विस्तृत जांच रिपोर्ट में इस महाघोटाले की पूरी तरह से पुष्टि हो गई है। सरकारी रिकॉर्ड के मिलान से यह साबित हुआ है कि कुल 113 महिलाओं के बायोमेट्रिक और आधार का अवैध इस्तेमाल कर कुल 980 बोरी खाद बाजार में बेचने या गायब करने के उद्देश्य से निकाली गई थी।

इस मामले पर बलरामपुर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मुख्य आरोपियों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस रैकेट में कृषि विभाग या सहकारी समिति का कोई और बड़ा अधिकारी भी शामिल है। फिलहाल इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के अन्य सीएससी सेंटर्स और खाद दुकानों में हड़कंप मचा हुआ है।