नई दिल्ली। देश की राजधानी के रोहिणी इलाके में हुए एक दर्दनाक इमारत हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले मकान मालिक की मौत से ठीक पहले सोशल मीडिया पर की गई एक भावुक पोस्ट अब उनके परिवार और परिचितों के लिए एक कभी न भूलने वाला दर्द बन गई है।

हादसे से कुछ घंटे पहले पोस्ट की गई रील बनी जीवन का आखिरी संदेश

रोहिणी हादसे का शिकार हुए मकान मालिक राम दुआ को शायद अपनी जिंदगी के आखिरी पलों का थोड़ा बहुत आभास हो गया था। उन्होंने इस दुखद घटना के होने से कुछ समय पहले ही अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील साझा की थी, जिसमें उन्होंने जिंदगी की सच्चाई को बयां करते हुए लिखा था कि वे अमीर हैं, अमर नहीं, और एक दिन सबको जाना है। संगीत और रील बनाने के शौकीन राम दुआ की इस आखिरी पोस्ट को देखकर अब उनका परिवार और विशेषकर उनके बेटे फूट-फूट कर रो रहे हैं और अपने पिता को याद कर रहे हैं।

केटरिंग के कारोबार से जुड़े हंसमुख और परोपकारी स्वभाव के थे राम दुआ

मृतक के परिजनों और पड़ोसियों के अनुसार, राम दुआ अपने इलाके में एक बेहद मिलनसार, सामाजिक और धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान के रूप में जाने जाते थे। वे हमेशा बिना किसी दिखावे के जरूरतमंदों और गरीबों की आर्थिक मदद करने के लिए तैयार रहते थे। केटरिंग के व्यवसाय से जुड़े राम दुआ के इस काम में उनके दोनों बेटे भी उनका हाथ बंटाते थे। उनके परोपकारी और मददगार स्वभाव के कारण आसपास के सभी लोग उनका बेहद सम्मान करते थे और आज उनकी कमी हर किसी को खल रही है।

चालीस साल पुराने आशियाने को नया रूप देने की चाहत में हुआ हादसा

जिस निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत के ढहने से यह हादसा हुआ, वह असल में राम दुआ का पैतृक निवास स्थान था, जहाँ वे पिछले चार दशकों से अपने परिवार के साथ रह रहे थे। करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने अपने बेटों की सहमति से इस पुराने मकान को तोड़कर एक नया और आधुनिक घर बनाने का फैसला किया था। लगभग एक साल से यहाँ निर्माण कार्य चल रहा था और काम के सिलसिले में वे पास की ही एक गली में किराए का मकान लेकर रह रहे थे। बुधवार को दोपहर का भोजन करने के बाद वे रोज की तरह निर्माण कार्य की प्रगति देखने के लिए साइट पर आए थे।

मलबे के नीचे दबी रह गईं उम्मीदें और देर रात बरामद हुआ शव

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब यह हादसा हुआ तब राम दुआ ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग एरिया के पास कुर्सी डालकर निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे। अचानक भरभराकर गिरी इमारत के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही परिजन बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे और उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद आ रहा था। परिवार के मन में आखिरी वक्त तक यह उम्मीद थी कि शायद वे मलबे में न होकर कहीं और सुरक्षित होंगे, लेकिन देर रात रेस्क्यू टीम ने जैसे ही उनका निष्प्राण शरीर मलबे से बाहर निकाला, परिवार की सभी उम्मीदें टूट गईं।