18 लाख लेकर किया धोखा, प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं कराई; कंपनी के तीन लोग मुश्किल में
इंदौर| इंदौर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सुपर कॉरिडोर जैसे पॉश इलाके में प्लॉट बेचने का झांसा देकर लाखों रुपये की जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम ने एक पीड़ित महिला की लिखित शिकायत पर तत्परता दिखाते हुए 'यूनाइटेड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी से जुड़े तीन कथित डायरेक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि शातिर जालसाजों ने जमीन का पूरा सौदा तय कर महिला से 18.75 लाख रुपये हड़प लिए, लेकिन बाद में न तो जमीन की रजिस्ट्री कराई और न ही उनकी रकम वापस की। पुलिस को अंदेशा है कि यह एक बड़ा रैकेट हो सकता है, इसलिए अब इस बात की भी गहन जांच की जा रही है कि आरोपियों ने इसी तरह अन्य भोले-भाले निवेशकों को भी अपनी ठगी का शिकार तो नहीं बनाया है।
क्राइम ब्रांच में लिखित शिकायत के बाद शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के मुताबिक, यशवंत निवास रोड क्षेत्र की रहने वाली वनिता डांगी ने इस धोखाधड़ी को लेकर पुलिस से न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि अप्रैल 2024 में वह निवेश के उद्देश्य से सुपर कॉरिडोर के नजदीक स्थित ऑर्चर्ड पार्क कॉलोनी में प्लॉट देखने गई थीं। वहां साइट पर उनकी मुलाकात कंपनी के कर्ता-धर्ता त्रिलोकी प्रसाद गुप्ता और अनीता गहलोत से हुई। दोनों ने खुद को यूनाइटेड इंफ्रा कंपनी का मुख्य डायरेक्टर बताते हुए वनिता को करीब 1000 वर्ग फीट का एक प्राइम प्लॉट दिखाया। आरोपियों ने महिला को अपने झांसे में लेते हुए उस जमीन की कुल कीमत 25 लाख रुपये तय की थी।
18.75 लाख रुपये का बड़ा भुगतान, फिर भी हाथ रही खाली
दर्ज मामले के अनुसार, सौदा पक्का होने के बाद 10 अप्रैल 2024 को बकायदा प्लॉट का एग्रीमेंट टू सेल (विक्रय पत्र) तैयार किया गया। विश्वास जीतने के लिए वनिता ने शुरुआत में आरोपियों को 50 हजार रुपये की टोकन मनी नकद दी। इसके बाद अनुबंध की शर्तों के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग तारीखों में बैंक ट्रांसफर और अन्य माध्यमों से कुल 18.75 लाख रुपये का बड़ा भुगतान कंपनी के खाते में कर दिया। दोनों पक्षों के बीच यह लिखित सहमति बनी थी कि बची हुई 6 लाख रुपये की शेष राशि रजिस्ट्री फाइनल होने के समय सीधे कोर्ट में दी जाएगी।
रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल और अंत में मिली जान से मारने की धमकी
पीड़ित महिला का गंभीर आरोप है कि जब उन्होंने अपनी तरफ से करीब 75 प्रतिशत से ज्यादा की रकम का भुगतान कर दिया, तब भी कंपनी के जिम्मेदार लोग रजिस्ट्री करने से लगातार कतराते रहे। जब भी महिला दबाव बनाती, आरोपी कोई न कोई प्रशासनिक बहाना बनाकर तारीख आगे बढ़ा देते थे। कुछ समय बाद जब महिला ने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने नया पैंतरा खेलते हुए उन्हें उसी प्रोजेक्ट में कोई दूसरा प्लॉट लेने का सुझाव दिया और जल्द ही मामला सुलझाने का झूठा आश्वासन दिया।
विवाद तब और बढ़ गया जब अक्टूबर 2025 में मुख्य आरोपी त्रिलोकी प्रसाद गुप्ता ने अपने असली तेवर दिखाते हुए महिला को दो टूक कह दिया कि अब न तो उन्हें कोई जमीन दी जाएगी और न ही उनके पैसे वापस मिलेंगे। पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि जब उन्होंने कानूनी कार्रवाई की बात कही, तो आरोपियों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की गंभीर धमकी भी दी।
अन्य शिकार हुए लोगों की तलाश में जुटी पुलिस की विशेष टीमें
कई महीनों तक लगातार चक्कर काटने और मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद, जब वनिता को न तो अपने सपनों का प्लॉट मिला और न ही गाढ़ी कमाई वापस मिली, तब उन्होंने थक-हारकर इंदौर क्राइम ब्रांच का दरवाजा खटखटाया। क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की प्रारंभिक जांच में आरोपों को सही पाया और यूनाइटेड इंफ्रा के तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी/बीएनएस की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
पुलिस अब कंपनी के बैंक खातों को सीज करने की तैयारी कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जी प्रोजेक्ट के नाम पर इंदौर और आसपास के जिलों में कुल कितने लोगों से पैसे एंठे गए हैं। पुलिस ने जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया है।
राशिफल 23 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
कृषि, पशुपालन और उद्यम से जुड़ी धरमजयगढ़ की महिलाएं अब स्थानीय बीजों और अनाजों से बना रहीं राखियां
विष्णुभोग चावल बना जीपीएम जिले का गौरव
रेल यात्रियों और मासूम बच्चों की सुरक्षा के प्रति जीआरपी की संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण
नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान को प्रदेशभर में मिल रहा जनसमर्थन