अमायरा केस का नया फुटेज आया सामने, मासूम की गुहार सुन रो पड़े माता-पिता
जयपुर: महानगर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में घटी एक मासूम छात्रा की दर्दनाक मौत के मामले ने महीनों बाद एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है. इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक नया वीडियो साक्ष्य के रूप में सामने आने के बाद प्रशासनिक और कानूनी हलकों में खलबली मच गई है. यह नया साक्ष्य उस वक्त की पूरी कहानी को बयां कर रहा है, जिसने जांच एजेंसियों के दावों और स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर कई गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
नए वीडियो में उजागर हुई मासूम की बेबसी, परिजनों ने बयां किया दर्द
कक्षा चौथी की छात्रा की असमय मौत के करीब आठ महीने बीत जाने के बाद सामने आए इस नए फुटेज को लेकर मृतका के माता-पिता ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. परिजनों का कहना है कि लगभग आठ मिनट के इस वीडियो क्लिप को ध्यान से देखने पर साफ पता चलता है कि मासूम बच्ची किसी भारी मानसिक तनाव या परेशानी से गुजर रही थी. वह अपनी तकलीफ को साझा करने और मदद की गुहार लगाने के लिए बार-बार अपनी कक्षा अध्यापिका के पास जाती हुई दिखाई दे रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घटना के ठीक पहले स्कूल के भीतर कुछ ऐसा घटित हुआ था जिसने बच्ची को अंदर से झकझोर दिया था.
क्लास रूम के भीतर की संदिग्ध गतिविधियां और स्कूल प्रशासन की अनदेखी
परिजनों द्वारा वीडियो के विश्लेषण के आधार पर यह आरोप लगाया गया है कि सामान्य रूप से शुरू हुए दिन के बाद अचानक कक्षा के भीतर का माहौल बदल गया था. फुटेज के मुताबिक, कुछ छात्र स्कूल नियमों के विपरीत जाकर डिजिटल स्लेट पर कुछ संदिग्ध बातें लिखकर मासूम छात्रा को दिखा रहे थे, जिसके तुरंत बाद वह बेहद असहज और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस करने लगी. अपनी इस घबराहट को दूर करने के लिए जब वह बार-बार शिक्षिका की मेज के पास पहुंची और एक अन्य छात्र ने भी शिक्षिका का ध्यान उस ओर आकर्षित करना चाहा, तब भी उसकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया गया और उसे डांटकर वापस सीट पर भेज दिया गया, जिसके बाद वह रोते हुए कॉरिडोर की तरफ निकल गई.
अधूरी पुलिसिया तफ्तीश पर उठे सवाल, परिजनों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
इस नए साक्ष्य के आधार पर मृतका के माता-पिता ने स्थानीय पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश की गई चार्जशीट को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एकतरफा करार दिया है. उनका गंभीर आरोप है कि जांच अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को बचाने का प्रयास किया है और मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी संगीन धाराओं को शामिल नहीं किया. परिवार ने साफ किया है कि वे इस अधूरी जांच के खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय तक न्याय की गुहार लगाएंगे. इस लड़ाई में अब विभिन्न अभिभावक संगठन भी परिवार के समर्थन में उतर आए हैं और मामले की दोबारा निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है.
कानूनी साक्ष्यों पर पुलिस की सफाई, अब कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
दूसरी तरफ, पुलिस के आला अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पूरी तरह से उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही तैयार की गई है. जांच एजेंसी का तर्क है कि तफ्तीश के दौरान जो भी पुख्ता सबूत और गवाह सामने आए, उन्हीं के अनुरूप कानूनी धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस प्रशासन का कहना है कि अब यह पूरा मामला न्यायालय के विचाराधीन है और दोनों पक्षों की दलीलों व रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को देखने के बाद ही अदालत इस संवेदनशील मामले में अपना अंतिम और सर्वमान्य फैसला सुनाएगी.
राशिफल 23 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
कृषि, पशुपालन और उद्यम से जुड़ी धरमजयगढ़ की महिलाएं अब स्थानीय बीजों और अनाजों से बना रहीं राखियां
विष्णुभोग चावल बना जीपीएम जिले का गौरव
रेल यात्रियों और मासूम बच्चों की सुरक्षा के प्रति जीआरपी की संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण
नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान को प्रदेशभर में मिल रहा जनसमर्थन