जयपुर। राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के मोर्चरी विभाग में बुधवार को एक ऐसा भावुक और दिल दहला देने वाला मंजर देखा गया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। रोज शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के सामने जब उनके अपने ही गुरु और फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. नंदलाल डिसानिया का शव आया, तो वहां मौजूद हर शख्स फफक-फफक कर रो पड़ा। डॉक्टरों से लेकर वार्ड बॉय तक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रहे थे। अस्पताल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कोई भी डॉक्टर अपने गुरु के पार्थिव शरीर पर कटर या छुरी चलाने को तैयार नहीं था। सभी डॉक्टरों का एक ही कहना था कि जिन्होंने उन्हें चिकित्सा की बारीकियां सिखाईं, आज वे उनके ही सीने पर सर्जिकल ब्लेड नहीं चला पाएंगे।

मोर्चरी में जब कांप उठे डॉक्टरों के हाथ

इस बेहद संवेदनशील स्थिति को संभालना अस्पताल प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया था। डॉक्टरों के भारी विरोध और भावुकता को देखते हुए एक समय प्रशासन ने विचार किया कि पोस्टमार्टम को किसी अन्य सरकारी अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया जाए। हालांकि, बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने साथी डॉक्टरों को समझाया और एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। मेडिकल बोर्ड का हिस्सा रहीं डॉ. दीपाली ने बेहद भारी मन से बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें अपने ही एचओडी का पोस्टमार्टम करना पड़ेगा। प्रक्रिया के दौरान सभी डॉक्टरों के हाथ कांप रहे थे और जिस गुरु से उन्होंने जिंदगी भर सब कुछ सीखा, आज उन्हीं के शव के सामने खड़े होकर खुद को संभालना जिंदगी का सबसे मुश्किल काम था।

तीन दशकों का साथ और प्रदेश को बड़ी सौगात

डॉ. नंदलाल डिसानिया सिर्फ एक बेहतरीन शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक बेहद मिलनसार और सामाजिक इंसान भी थे। उनके साथ साल 1996 से काम कर रहे सहयोगी डॉ. सुमंत दत्ता ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि वह हर सुबह सभी को गुड मॉर्निंग का संदेश भेजकर दिन की शुरुआत करते थे। डॉ. डिसानिया के अथक प्रयासों की बदौलत ही एसएमएस अस्पताल में राजस्थान की पहली 'पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल लैब' की स्थापना हो सकी थी। उनके सहकर्मियों के लिए यह विश्वास कर पाना नामुमकिन सा हो रहा था कि जिस साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उन्होंने 30 वर्षों में हजारों पोस्टमार्टम किए, आज उसी का पोस्टमार्टम उन्हें अपनी आंखों से देखना पड़ रहा है।

सुबह बेटी को किया विदा और फिर उठाया आत्मघाती कदम

इस पूरी दुखद घटना की शुरुआत बुधवार तड़के हुई, जब फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. नंदलाल डिसानिया ने अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। सुबह करीब 6 बजे उनका डॉक्टर बेटा अविनाश अपनी बहन को छोड़ने एयरपोर्ट गया था। घर से निकलते वक्त डॉ. डिसानिया ने बेहद सामान्य तरीके से अपनी बेटी को अलविदा कहा था। लेकिन जब अविनाश एयरपोर्ट से वापस घर लौटा, तो पिता को फंदे से लटका पाया। उन्हें तुरंत आनन-फानन में नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही पूरे मेडिकल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

लंबे समय से अवसाद से जूझ रहे थे डॉक्टर

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। घर की तलाशी और शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि डॉ. डिसानिया पिछले काफी समय से गंभीर डिप्रेशन (अवसाद) से जूझ रहे थे और मनोचिकित्सक से उनका इलाज भी चल रहा था। उन्होंने अपनी मौत से महज कुछ दिन पहले, 5 जुलाई को भी डॉक्टर से परामर्श लिया था। डॉ. डिसानिया अपने पीछे पत्नी, चार बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। जहां एक तरफ उनका पूरा परिवार इस वज्रपात से पूरी तरह टूट चुका है, वहीं सवाई मानसिंह अस्पताल का हर एक स्टाफ सदस्य भी अपने मार्गदर्शक को खोने के गम में डूबा हुआ है।