अब सूरज की रोशनी से दौड़ेंगी मेट्रो ट्रेनें, DMRC का बड़ा सौर ऊर्जा प्लान
नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) देश की राजधानी को प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। अपनी बिजली की भारी-भरकम दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने अब बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस पहल के तहत न सिर्फ दिल्ली मेट्रो के विशाल परिसरों, कार्यालयों और स्टेशनों में रोशनी व अन्य तकनीकी उपकरणों के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि अब मेट्रो ट्रेनों के पहिए भी इसी हरित ऊर्जा के दम पर दौड़ रहे हैं।
बाहरी राज्यों के संयंत्रों और अपनी छतों से हो रहा बिजली उत्पादन
दिल्ली मेट्रो अपनी जरूरत की बिजली पैदा करने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है ताकि पारंपरिक बिजली पर निर्भरता को कम किया जा सके। इसके तहत जहां एक तरफ देश के अन्य राज्यों में स्थापित विशाल सौर ऊर्जा संयंत्रों से सीधे बिजली खरीदी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के भीतर मौजूद मेट्रो स्टेशनों और डीएमआरसी की अन्य संपत्तियों की छतों का भी पूरा सदुपयोग किया जा रहा है। इन सभी छतों पर अत्याधुनिक रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिससे रोजाना बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन कर उसे मुख्य ग्रिड में शामिल किया जा रहा है।
चौथे चरण के एलिवेटेड स्टेशनों की छतों पर बिछेगा सोलर पैनल का जाल
हरित ऊर्जा के इस दायरे को और अधिक व्यापक बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो ने अपने आगामी विस्तार को भी पूरी तरह से इको-फ्रेंडली बनाने की तैयारी कर ली है। इसी बड़ी कार्ययोजना की अगली कड़ी के रूप में मेट्रो के चौथे चरण के तहत बनाए जा रहे उनसठ एलिवेटेड स्टेशनों की छतों को सौर ऊर्जा उत्पादन केंद्र में बदलने का फैसला किया गया है। इन सभी निर्माणाधीन ऊंचे स्टेशनों की छतों पर विशेष डिजाइन के सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे स्टेशनों के शुरू होते ही वहां से बिजली का उत्पादन भी अपने आप शुरू हो जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में डीएमआरसी का बड़ा कदम
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा फायदा यह हो रहा है कि दिल्ली मेट्रो अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के मामले में तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रही है। सौर ऊर्जा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से न केवल मेट्रो प्रबंधन के करोड़ों रुपये के बिजली बिल की बचत हो रही है, बल्कि इससे कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी दर्ज की जा रही है। पर्यावरणविदों ने भी मेट्रो के इस कदम की सराहना की है क्योंकि यह मॉडल देश के अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रहा है।
सुगम सफर के साथ प्रदूषण मुक्त दिल्ली बनाने का नया संकल्प
दिल्ली मेट्रो का यह ग्रीन प्रोजेक्ट आने वाले समय में शहर की हवा को साफ रखने और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौती से निपटने में गेम चेंजर साबित होने वाला है। चौथे चरण के सभी नए रूटों पर जब सौर ऊर्जा से चलने वाली ट्रेनें दौड़ेंगी, तो यात्रियों को न सिर्फ विश्वस्तरीय और सुगम सफर की सुविधा मिलेगी, बल्कि वे अनजाने में ही सही पर्यावरण को बचाने की इस बड़ी मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन जाएंगे। मेट्रो प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में अपनी कुल खपत का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह से सौर ऊर्जा से ही संचालित करने का है।
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