पितृ हैं नाराज? हरिद्वार के इन घाटों पर करें छोटा सा काम, बरसने लगेगी कृपा, स्कंद पुराण में ये ट्रिक
पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास पूजा पाठ, हवन यज्ञ, व्रत आदि करने के लिए बेहद शुभ होता है. संवत में कुल 12 मास होते हैं जबकि अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का आगमन तीन संवत के बाद होता है. ये मास भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान और नाराज पितरों को मनाने का सबसे उत्तम समय है. संयोग से संवत 2083 में पुरुषोत्तम मास के आखिरी पक्ष में पितृ कार्येषु अमावस्या का आगमन 14 जून को होगा. इस दिन हरिद्वार के कुछ स्थानों पर पितृ कार्य करने से सभी पितृ तृप्त होकर अपने धाम लौट जाएंगे. इन स्थानों का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में किया गया है.
अधिक मास की पितृ कार्येषु अमावस्या पर हरिद्वार के किन स्थानों पर पितृ कार्य करने से लाभ होगा, इस बारे में हरिद्वार के विद्वान पंडित श्रीधर शास्त्री हैं कि संयोग से अधिक मास में पितृ कार्यों के लिए पितृ कार्येषु अमावस्या का आगमन 14 जून को होगा. नाराज पितरों को मनाने के लिए अधिक मास की पितृ कार्येषु अमावस्या बेहद खास है.
पंडित श्रीधर शास्त्री के मुताबिक, इस दिन हरिद्वार में हर की पौड़ी पर अस्थि प्रवाह घाट, हर की पौड़ी के कुशा घाट, नील धारा पर बने चंडी घाट यानी नमामि गंगे घाट, हरिद्वार की उपनगरी और भोलेनाथ की ससुराल कनखल में प्राचीन शीतला माता घाट, हरिद्वार शहर के मध्य देवपुरा के पास प्राचीन नारायणी शिला मंदिर पर पिंडदान, तर्पण, जलांजलि, तिलांजलि, पितृ गायत्री का पाठ आदि करने पर नाराज भी प्रसन्न हो जाएंगे.
और कहां जाएं
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि इन सभी स्थानों का वर्णन हिंदू धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण के केदार खंड में किया गया है. इन स्थानों पर अपने पितरों का श्राद्ध कर्म पितृ कार्य 14 जून को पितृ कार्येषु अमावस्या पर करने से रूठे हुए पितृ प्रसन्न होंगे और अपने वंशजों पर उनकी विशेष कृपा बनाएं रखेंगे. इन स्थानों के अलावा धर्मानगर हरिद्वार में गंगा किनारे भी पितरों के उद्धार के लिए पितृ कार्य करने की धार्मिक मान्यता है.
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