मेजर अभिलाषा ने बताया शांति का रास्ता, पुनर्निर्माण और सहयोग पर दिया बल
लेबनान: संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UN Peacekeeping) में तैनात भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने युद्ध प्रभावित देशों में स्थायी शांति बहाली के लिए वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत को सबसे अहम हथियार बताया है। मेजर बराक ने जोर देकर कहा कि किसी भी युद्धग्रस्त क्षेत्र में संघर्ष समाप्त होने के बाद केवल सड़कों, पुलों और इमारतों का ढांचा खड़ा करना ही पुनर्निर्माण नहीं है, बल्कि युद्ध की विभीषिका और मानसिक आघात झेल रहे स्थानीय लोगों के मनोवैज्ञानिक घावों को भरना और उन्हें सामान्य जीवन में लौटाना सबसे बड़ी चुनौती और जरूरत है।
बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा रास्ता
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मेजर बराक ने वैश्विक हालातों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मुझे पूरी उम्मीद है कि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ेगी और युद्धविराम पूरी तरह जारी रहेगा। जब जमीन पर शांति होगी, तभी हम पीड़ित समुदाय के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। हमें बुनियादी ढांचे के साथ-साथ वहां के लोगों के दिलों और दिमाग को भी ठीक करना होगा।"
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' से नवाजा
भारतीय सेना की इस बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। मेजर अभिलाषा बराक को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ओर से वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' पुरस्कार प्रदान किया गया है।संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने मेजर अभिलाषा की सराहना करते हुए उन्हें दुनिया के लिए एक 'रोल मॉडल' बताया। उन्होंने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर एक कमांडर के रूप में मेजर बराक ने संकटग्रस्त इलाकों में हजारों महिलाओं और लड़कियों तक सीधी पहुंच बनाई और शिक्षा, स्वास्थ्य व व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए उनके जीवन में एक क्रांतिकारी और सकारात्मक बदलाव लाया है।
दुनिया के सबसे खतरनाक मिशन 'UNIFIL' में संभाल रही हैं कमान
मेजर बराक वर्तमान में दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत भारतीय बटालियन के साथ 'एंगेजमेंट टीम कमांडर' और 'जेंडर फोकल प्वाइंट' के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह क्षेत्र वर्तमान में बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यहाँ ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इस्राइल के बीच लगातार हिंसक संघर्ष जारी रहा है। इस मिशन को दुनिया के सबसे खतरनाक शांति अभियानों में से एक माना जाता है, जहां विपरीत परिस्थितियों में काम करते हुए मार्च महीने से अब तक 7 शांति सैनिकों की जान जा चुकी है।
हाल ही में अमेरिकी मध्यस्थता के बाद यहाँ युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद रुक-रुक कर संघर्ष और उल्लंघन की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।
स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प
मेजर बराक ने अपने जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि युद्धग्रस्त इलाकों में कई स्थानीय महिलाएं और किशोरियां पुरुष शांति सैनिकों के साथ खुलकर अपनी समस्याएं साझा करने में हिचकिचाती थीं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता महिलाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था।
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सशक्तिकरण: महिलाओं को पैरों पर खड़ा करने के लिए विशेष व्यावसायिक और हुनर विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए।
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जागरूकता: इसके अलावा महिलाओं और बच्चियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस, मनोरंजक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया ताकि उनके भीतर सुरक्षा और विश्वास की भावना पैदा हो सके।
भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट एविएटर हैं मेजर अभिलाषा
मेजर अभिलाषा बराक के नाम सेना में एक और स्वर्णिम इतिहास दर्ज है—वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट (युद्धक विमान पायलट) हैं। इससे पहले वे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) के रूप में भी देश की शानदार सेवा कर चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र मिशन में उनके इस अभूतपूर्व योगदान को वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
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