ग्राम पंचायतों से देशभर में नए संसदीय मॉडल की शुरुआत, राजस्थान में पायलट प्रोजेक्ट
दस्तावेजों की विसंगति दूर करने पर विशेष जोर
कोटा: लोकसभा अध्यक्ष और स्थानीय सांसद ओम बिरला ने कोटा-बूंदी क्षेत्र के विकास को लेकर संसद भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने के निर्देश दिए। बिरला ने रेखांकित किया कि अक्सर पहचान पत्रों जैसे वोटर आईडी, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में नाम या विवरण की भिन्नता के कारण पात्र नागरिक लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इन विसंगतियों को प्राथमिकता से दूर किया जाए ताकि डेटा की सीडिंग प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम हो सके।
सटीक डेटाबेस के जरिए योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन
सांसद बिरला ने जिला कलेक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूरे संसदीय क्षेत्र का एक विस्तृत और सटीक डेटाबेस तैयार किया जाए। इस डेटाबेस में यह स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए कि कितने नागरिकों को वर्तमान में योजनाओं का लाभ मिल रहा है और कौन से वर्ग अभी भी इनसे अछूते हैं। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान आरोग्य योजना, पेंशन और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का लाभ बिना किसी तकनीकी बाधा के सीधे लाभार्थियों तक पहुँचे।
पायलट प्रोजेक्ट के लिए दो ग्राम पंचायतों का चयन
इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रथम चरण में दो ग्राम पंचायतों का चयन 'पायलट प्रोजेक्ट' के रूप में किया गया है। बूंदी जिले की तालेड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत गणेशपुरा (भीलों का) और कोटा की लाडपुरा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मांदलिया में इस अभियान की शुरुआत होगी। इन पंचायतों में योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के बाद, वहां के अनुभवों और सफलता के आधार पर इस मॉडल को पूरे कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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