अशोकनगर में इंसानियत शर्मसार, एंबुलेंस न मिलने पर चादर में ले गए शव
अशोकनगर: सिस्टम की बेरहमी, पोस्टमार्टम के बाद बेटी का शव चादर में लपेटकर ले जाने को मजबूर हुए परिजन
अशोकनगर: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। यहां एक मजबूर पिता को अपनी 15 वर्षीय बेटी के शव को अस्पताल से घर ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। अंततः बेबस परिजन शव को एक चादर में लपेटकर पैदल ही गांव की ओर निकल पड़े।
दुखद घटना का घटनाक्रम: यह मर्मस्पर्शी मामला खेरोदा चक गांव का है। यहां रहने वाले रामचरण आदिवासी की 15 साल की बेटी गन्तोबाई ने शनिवार (2 मई) को अज्ञात कारणों से खुदकुशी कर ली थी। पिता के अनुसार, घटना के समय इलाके में तेज आंधी-तूफान चल रहा था। बेटी अपनी मां से आराम करने का कहकर कमरे में गई और वहां जीवनलीला समाप्त कर ली।
अस्पताल की संवेदनहीनता: रविवार (3 मई) को बहादुरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मृतका का पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद असली संघर्ष शुरू हुआ।
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एंबुलेंस का इंतजार: परिजन करीब 3 घंटे तक एंबुलेंस के लिए भटकते रहे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन सरकारी सिस्टम ने उनकी एक न सुनी।
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चादर में शव: जब कोई वाहन उपलब्ध नहीं हुआ, तो लाचार परिजनों ने शव को एक चादर में लपेटा और उसे अपने कंधों के सहारे पैदल ही गांव की ओर ले जाने लगे।
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मदद का हाथ: जब परिजन करीब 200 मीटर तक पैदल चले गए, तब वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों का दिल पसीजा और उन्होंने निजी कार की व्यवस्था कर शव को गांव तक भिजवाया।
प्रबंधन पर गंभीर सवाल: इस पूरी घटना ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है। खबरों के मुताबिक, अस्पताल में संवेदनशीलता की भारी कमी देखी गई:
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शव को सम्मानजनक तरीके से ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर दिया गया और न ही वार्ड बॉय की मदद मिली।
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पोस्टमार्टम के बाद शव के साथ होने वाली न्यूनतम औपचारिकताओं और गरिमा का भी ख्याल नहीं रखा गया।
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प्रक्रिया के दौरान महिला पुलिसकर्मी की उपस्थिति भी सुनिश्चित नहीं की गई थी।
यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी एंबुलेंस सुविधा आम आदमी की पहुंच से कितनी दूर है। एक ओर परिवार अपनी जवान बेटी को खोने के गम में था, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की इस बेरुखी ने उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया।
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