राजस्थान के 8 जिलों में अचानक ब्लैकआउट, 10-15 मिनट तक बिजली गुल
राजस्थान के 8 जिलों में 'ऑपरेशन ब्लैकआउट': सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए अंधेरे में डूबे शहर
जयपुर/जैसलमेर: राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों सहित कुल आठ जिलों में शुक्रवार की रात युद्ध स्तर की आपातकालीन तैयारियों का जायजा लिया गया। गृह विभाग के दिशा-निर्देशों पर जैसलमेर, बाड़मेर, धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, दौसा, जालोर और झुंझुनूं में 'ब्लैकआउट एक्सरसाइज' और 'एयर स्ट्राइक मॉक ड्रिल' का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान करीब 10 से 15 मिनट तक बिजली बंद रखकर संकटकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल को परखा गया।
जैसलमेर: सायरन की गूंज और गहराता सन्नाटा
सीमावर्ती जिले जैसलमेर में रात करीब 8:30 बजे जैसे ही खतरे का सायरन गूंजा, ऐतिहासिक सोनार दुर्ग से लेकर शहर की तमाम बस्तियां अंधकार के आगोश में समा गईं।
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नागरिक भागीदारी: स्थानीय निवासियों ने प्रशासन का सहयोग करते हुए घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद रखीं।
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सड़क का दृश्य: शहर की सड़कें खाली दिखीं, केवल आवश्यक सेवाओं के वाहन ही हेडलाइट जलाकर चलते नजर आए। 15 मिनट बाद दोबारा सायरन बजते ही बिजली बहाल की गई और जनजीवन सामान्य हुआ।
बाड़मेर: हवाई हमले के दौरान बचाव कार्य का अभ्यास
बाड़मेर जिला मुख्यालय पर रात 8:00 से 8:15 बजे तक पूर्ण ब्लैकआउट रहा। यहाँ पीजी राजकीय महाविद्यालय को केंद्र बनाकर हवाई हमले की स्थिति में राहत कार्यों का सजीव प्रदर्शन किया गया।
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प्रशासनिक मुस्तैदी: अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत की देखरेख में पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन टीमों ने घायलों को सुरक्षित निकालने का पूर्वाभ्यास किया।
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युवाओं की भूमिका: इस ड्रिल में एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड के छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रह सकें।
दौसा: ड्रोन और मिसाइल हमले का सिमुलेशन
दौसा में मॉक ड्रिल का नजारा काफी वास्तविक था। यहाँ पीजी कॉलेज परिसर में ड्रोन और मिसाइल हमलों का काल्पनिक दृश्य तैयार किया गया।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: सायरन बजते ही एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने मोर्चा संभाला। मलबे से 'घायलों' को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला गया और दमकल विभाग ने 'आग' पर काबू पाया।
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कलेक्टर का फीडबैक: जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा ने इस अभ्यास के रिस्पॉन्स टाइम को संतोषजनक बताया और कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद ऐसी ड्रिल विभागों के बीच आपसी समन्वय बढ़ाने में कारगर साबित होंगी।
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