चुनावी हलफनामों में क्रिप्टो खुलासे पर फैसला करे केंद्र, दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
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जसवंत सिंह राजपूत 
प्रदेश की न्यूज़, जबलपुर
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दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के चुनावी हलफनामों में क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के खुलासे से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर छह महीने के भीतर स्पष्ट और सूचित निर्णय ले।

यह मामला अधिवक्ता एवं RTI कार्यकर्ता दीपांशु साहू द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के जरिए सामने आया था। याचिका में मांग की गई थी कि Representation of the People Act, 1951 के तहत दाखिल किए जाने वाले Form 26 में क्रिप्टो संपत्तियों के लिए अलग और अनिवार्य कॉलम जोड़ा जाए, ताकि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की पूरी संपत्ति का खुलासा हो सके।


दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने 4 फरवरी 2026 को दिए आदेश में कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर नीति स्तर पर विचार करना केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों का काम है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि छह महीने के भीतर निर्णय लेकर उसकी जानकारी याचिकाकर्ता को भी दी जाए।

याचिकाकर्ता ने इससे पहले मार्च 2025 में चुनाव आयोग और वित्त मंत्रालय को अभ्यावेदन भेजकर क्रिप्टो संपत्तियों के अनिवार्य खुलासे की मांग की थी। वित्त मंत्रालय ने जवाब में कहा था कि सुझावों को नीति निर्माण के दौरान ध्यान में रखा जाएगा, जबकि कानून मंत्रालय ने इसे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय बताया था। चुनाव आयोग की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

याचिका में कहा गया है कि क्रिप्टो संपत्तियां 30 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आती हैं और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के तहत भी मान्य संपत्ति हैं, इसके बावजूद चुनावी हलफनामों में इनका खुलासा अनिवार्य नहीं है। इससे पारदर्शिता, मतदाताओं के सूचना के अधिकार और चुनावी जवाबदेही पर असर पड़ता है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब यह मामला केंद्र सरकार के नीति निर्णय पर निर्भर करता है।