बागेश्वर बाबा की पदयात्रा में टाइट रहेगी व्यवस्थाएं, इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी
छतरपुर: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 10 दिनों की पदयात्रा निकालने जा रहे हैं. जिसकी तैयारियों को लेकर उन्होंने मीडिया से बात की और पदयात्रा से जुड़ी कई अहम जानकारी साझा की. धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि पदयात्रा के दौरान किन जरूरी बातों का ध्यान रखना है और कौन इस यात्रा में शामिल हो सकता है. इसके साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस पदयात्रा से जुड़ने इस्लाम धर्म के लोग भी आ रहे हैं.
बागेश्वर बाबा की पदयात्रा में ऐसी रहेगी व्यवस्थाएं
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि 7 नवंबर से 16 नवंबर तक यह पदयात्रा दिल्ली से वृंदावन तक निकाली जाएगी. जिसका नाम हिंदू एकता पदयात्रा होगा. इस यात्रा में कोई भी अस्त्र-शस्त्र लेकर नहीं चलेगा. न ही हूटरबाजी और फूहड़बाजी चलेगी और माताओं-बहनों की सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाएगा. खानपान की व्यवस्था रहेगी. जहां लाइन लगाकर आपको खाना-पीना लेना होगा. भगदड़ नहीं करना है. इसके साथ ही महिला सेवादारनी व महिला वालंटियर बनाई गईं है. उनके रुकने-स्नान ध्यान की व्यवस्था अलग की जाएगी. निरीक्षण कमेटी बनाई गई है, जो यात्रा पर नजर रखेगी. जहां शिविर होंगे, वहां सीसीटीवी लगाए गए हैं.
किसी दूसरे धर्म के खिलाफ नारेबाजी और अनर्गल बातें नहीं होगी
साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि किसी दूसरे धर्म के खिलाफ नारेबाजी नहीं की जाएगी. किसी को भी अपने मन किसी दूसरे के खिलाफ कुछ बोलने या संवाद करने का अधिकार नहीं है. 10 दिन की यात्रा में हिंदू एकता पर जोर देंगे, हिंदूओं से एकता की भिक्षा मांगेंगे. रजिस्ट्रेशन के अलावा भी सभी को आने की अनुमति है, जो नहीं आ सकते वे घर बैठे भी यात्रा का समर्थन कर सकते हैं. उन्होंने बताया इस यात्रा को लेकर सरकार से कोई मांग या अपेक्षा नहीं है. यात्रा के दौरान सुबह राष्ट्रगान और हनुमान चालीसा होगी और शाम को भी हनुमान चालीसा होगी. दो धर्म ध्वज चलेंगे, उसके बीच में ही लोगों को रहना है
इस्लाम धर्म से भी 300 लोग होंगे शामिल
बागेश्वर बाबा ने कहा कि इस यात्रा में इस्लाम धर्म के करीब 300 लोग अपनी तरफ से शामिल होना चाहते हैं. मैंने उनकी मांग स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा हमारा एक ही संकल्प है हिंदू एकता से हिंदू राष्ट्र. बताया जा रहा है कि इस पदयात्रा में तीन राज्यों दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 422 ग्राम पंचायतों, नगरों की 5 करोड़ आबादी पहुंच सकती है.
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