जबलपुर में आदिवासी जमीन घोटाला: पत्रकार गंगा पाठक की संपत्ति का खुलेगा राज

जसवंत सिंह राजपूत 
प्रदेश की न्यूज़

जबलपुर, 20 जून 2025: आदिवासी जमीन हड़पने के मामले में फरार चल रहे पत्रकार गंगा पाठक के खिलाफ जांच में अब तक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस मामले की तह तक जाने पर पता चलता है कि पत्रकारिता की आड़ में करोड़ों का खेल खेला गया।

🕵️‍♂️ मामले की तह:
गंगा पाठक व उसकी पत्नी ममता पाठक सहित अन्य सहयोगियों ने ऐंठाखेड़ा गाँव में आदिवासी परिवारों की जमीन फर्जी जाति प्रमाण पत्र और दस्तावेजों के माध्यम से अपने तथा पत्नी के नाम रजिस्टर्ड करवाई  ।

एसडीएम अभिषेक सिंह ठाकुर ने इस रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराते हुए जमीन पुनः असली आदिवासी मालिकों के नाम दर्ज करने के आदेश दिए  ।

यह घोटाला केवल एक जमीन तक सीमित नहीं है—जांच में सामने आया कि दर्जनों मामलों में इसी तरह की फर्जी गतिविधियाँ की गईं, जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम पर भू-हड़पे भी शामिल हैं।

💰 इनामी घोषित, पुलिस की दौड़ जारी:
प्रारंभिक रूप से गंगा पाठक पर ₹5,000 का इनाम घोषित हुआ, लेकिन बाद में DIG–रेंज जबलपुर ने इनाम राशि बढ़ाकर ₹20,000 कर दी।

पत्नी ममता पाठक पर ₹10,000 और सहयोगी द्वारका प्रसाद त्रिपाठी पर ₹15,000 का इनाम घोषित।

पुलिस ने ठिकानों पर कई छापामारियाँ की, खासकर सुखसागर कॉलोनी और फार्महाउस में—लेकिन सभी प्रयास असफल रहे और आरोपी अभी तक फरार हैं।

🏛️ विधिक स्थिति:
गंगा पाठक व उनकी पत्नीSC/ST एक्ट, धोखाधड़ी जैसी कई धाराओं के तहत आरोपी हैं  ।

हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जबकि सह-आरोपी द्वारका त्रिपाठी को कुछ दिन पहले जमानत मिल चुकी है।

🤔 संपत्ति कहा से आई ?
आरोपितों ने फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए जमीनों पर कब्जा किया और करोड़ों की संपत्ति बनी। इसमें राजस्व पटवारी, रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारी और दलालों की मिलीभगत की भी संभावना है  ।

जांच के तहत दलाल भूमाफियाओं की भूमिका उजागर हो रही है—जिन्होंने मृत व्यक्तियों के नामों पर एंट्री कर जमीन बेची  ।


🔍 आगे की कार्रवाई:
पुलिस लगातार गंगा पाठक व अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए अभियान चला रही है।

DIG–रेंज ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए गुप्त सूचना देने वालों को इनामी राशि का आश्वासन दिया है  ।

प्रशासन ने भ्रष्ट रजिस्ट्री एवं पटवारी अधिकारियों समेत पूरे दलाल नेटवर्क को निशाने पर लेने की रणनीति बनाई है।

👉निष्कर्ष:
पत्रकार गंगा पाठक और उनकी टीम द्वारा आदिवासी जमीनों पर कब्जा करके फर्जी संपत्ति अर्जित करने का एलान ही इस पूरे अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत खारिज होना इस बात की गवाही देता है कि मामला कितना संवेदनशील और विस्तृत है। अब यह देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन आरोपियों तक पहुंच पाएंगे और संपत्ति की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होगी या नहीं।

हमें उम्मीद है कि इस ख़बर से संबंधित ताज़ा अपडेट्स जैसे गिरफ्तारी के समाचार, आरोपियों की संपत्ति की जानकारी और उच्च न्यायालय के फैसले भी जल्द सामने आएंगे।