जबलपुर में BPL कार्ड घोटाला: फर्जी आदेश, नकली मुहर और हजारों की ठगी का खुलासा

जसवंत सिंह राजपूत 
(प्रदेश की न्यूज़)

जबलपुर। जिले के गोरखपुर अनुभाग में गरीबी रेखा (BPL) कार्ड को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस घोटाले में मुख्य आरोपी महिला सरिता उर्फ पीहू कोष्टा के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। महिला ने खुद को अधिकारी से जुड़ा बताकर लोगों से पैसे ऐंठे और फर्जी बीपीएल कार्ड जारी किए, जिन पर एसडीएम कार्यालय की नकली मुहर और हस्ताक्षर लगे हुए थे।

👉फर्जी कार्ड, नकली आदेश और ठगी का जाल
नगर निगम के कछपुरा जोन में कुछ लाभार्थियों द्वारा जमा किए गए बीपीएल कार्डों की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ। संभागीय अधिकारी की शिकायत पर एसडीएम के निर्देशानुसार नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा और पटवारी प्रभात परौहा की संयुक्त जांच टीम गठित की गई।

जांच के दौरान पाया गया कि कार्ड आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए थे और न ही उनका रिकॉर्ड एसडीएम कार्यालय में मौजूद था। सात लाभार्थियों से पूछताछ के बाद यह साफ हो गया कि यह कार्ड पूरी तरह फर्जी हैं।

👉2,000 से 5,000 रुपये में बिक रहे थे बीपीएल कार्ड
आरोपी सरिता कोष्टा ने कई गरीबों से बीपीएल कार्ड बनवाने के नाम पर 2,000 से 5,000 रुपये तक की राशि वसूली। वह लोगों को बताती थी कि उसके 'ऊपर तक लिंक' हैं और वह 'स्पेशल कोटे' से कार्ड बनवा सकती है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को एसडीएम कार्यालय की कंप्यूटर ऑपरेटर रितु रैकवार और उसके देवर राहुल बर्मन का सहयोग प्राप्त था। हालांकि इन दोनों के खिलाफ कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य अभी नहीं मिले हैं, सिवाय एक कॉल रिकॉर्डिंग के जो उनकी भूमिका पर संदेह को बढ़ा रही है।

👉एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी की तैयारी
गोरखपुर थाना पुलिस ने सरिता कोष्टा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और आरोपी की गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। अन्य संदिग्धों की भूमिका भी पुलिस जांच के दायरे में है।

👉घोटाले ने गरीबों की उम्मीदों को तोड़ा
फर्जी बीपीएल कार्ड बनवाने के इस मामले ने कई गरीब परिवारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। राशन, आवास, छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं का लाभ पाने की आशा लगाए लाभार्थी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वे अब पुलिस जांच में सहयोग कर रहे हैं और अपने बयान दर्ज करवा चुके हैं।

👉प्रशासनिक तंत्र पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी अंदरूनी सहयोग के सरकारी दस्तावेज, मुहर और हस्ताक्षर की इतनी सटीक नकल संभव नहीं मानी जा रही। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल है।

👉बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की जांच जारी
पुलिस अब लाभार्थियों के कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और पुराने आवेदनपत्रों की भी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लाभार्थी भी इस धोखाधड़ी में शामिल थे या वे सिर्फ ठगी के शिकार हुए हैं।

👉निष्कर्ष:
जबलपुर में सामने आया यह घोटाला इस ओर इशारा करता है कि शहर में फर्जी प्रमाण पत्र और सरकारी दस्तावेजों को लेकर सुनियोजित गैंग सक्रिय हैं। अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस पूरे जालसाजी तंत्र को कितनी गहराई से उजागर कर पाते हैं।